आओ चलो...

आओ चलो

आओ चलो...
आसमां की ताक पर
जो चाँद बादल की झाडियों में उलझा है,
उसे एक स्टूल पर पैर रखकर
अपने तलवे उचका कर
दोनों हाथों से बड़े जतन से उतार लायें

आओ चलो...
फिर उसमें अपना चेहरा देखकर मुस्कुराएँ
और फिर उसको थाली में सजाएं
कभी बच्चे को दे दें
की लो खेलो
कभी किसी के प्रेम कहानी के गवाही दिलवा दे
किसी को निहार ले इसमें
जो भुला-बिछडा हो
कोई दुल्हन अपना श्रृंगार करे

आओ चलो...
यह चांदी का सिक्का सबके गले में बाँध दें
किसी प्रियतम के दामन में टांक दें
किसी खास को तोहफे में दे दें
चलो, चाँद को धरती पर ले आयें
इससे पहले की विज्ञान
चाँद को एक और धरती में तब्दील कर दे
आओ चलो...
... सागर

4 टिप्पणियाँ:

परमजीत बाली said...

सागर जी,बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है।

चलो, चाँद को धरती पर ले आयें
इससे पहले की विज्ञान
चाँद को एक और धरती में तब्दील कर दे
आओ चलो...

विनय प्रजापति 'नज़र' said...

very good, keep writing...

दर्पण साह "दर्शन" said...

आओ चलो...आसमां की ताक पर जो चाँद बादल की झाडियों में उलझा है,उसे एक स्टूल पर पैर रखकर अपने तलवे उचका कर दोनों हाथों से बड़े जतन से उतार लायें
आओ चलो...फिर उसमें अपना चेहरा देखकर मुस्कुराएँ और फिर उसको थाली में सजाएं कभी बच्चे को दे दें की लो खेलो कभी किसी के प्रेम कहानी के गवाही दिलवा दे किसी को निहार ले इसमें जो भुला-बिछडा हो कोई दुल्हन अपना श्रृंगार करे
आओ चलो...यह चांदी का सिक्का सबके गले में बाँध दें किसी प्रियतम के दामन में टांक दें किसी खास को तोहफे में दे दें
चलो, चाँद को धरती पर ले आयें इससे पहले की विज्ञान चाँद को एक और धरती में तब्दील कर दे आओ चलो...
...koi aisi line nahi thi jisko quote nahi karna tha !!!

Behterinnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnn.....

(Dil se keh raha hoon...)

aur haan wo upar wali kavita (Zinda aanso mare zism type) bhi acchi thi.
:)

richa said...

आँख बोले कि ख़्वाब ख़्वाब खेलते रहो
रोज़ कोई एक चाँद बेलते रहो
चाँद टूटे तो टुकड़े टुकड़े बाँट लेना
गोल पहिया है रात दिन ढकेलते रहो....

बहुत ही प्यारी कविता... ( हम भी दिल से ही कह रहे हैं :-) )