हालात-ए-हाज़रा


गलियों में रात उतर गया होगा
तभी आमदो-रफ़्त घट गया होगा

रिश्ते मुलाकातों पर निगाहों से तसदीक करते हैं
इस दरम्यां दौलत में क्या इजाफा हुआ होगा

तुम्हारा तसव्वुर, तुम्हारे कांधे सा महकता है
तुम्हें ता-उम्र चांद ने नहलाया होगा

हो सके तो उस तिल को क्वांरा रखना
मेरे चूमे से जो गहरा गया होगा

अफसाने मुहब्बत के मौत में बदले
उसने सय्याद से हाथ मिला लिया होगा

सुना है वो वादी था, अब कमरा बन गया!
मेरी मानो, ईश्क में नाकाम हुआ होगा

मैं मुतमईन होकर खुदकशी का कायल हूं
लोग कहते हैं कि `साला! पगला गया होगा`

जेब भारी हो गए, कद घटने लगे
पेशे में जरूर 'हाँ जी- हाँ जी' मिला दिया होगा

अपनी मराहिल मैं तुम्हें क्या बताऊं मां
तुम कहोगी- तू फिर भूखा सोया होगा!

खबरें कहीं से भी राहतों के नज़र नहीं आते
तो क्या, खुदा शहर से बेवफा हुआ होगा?

पर्दे पर देखते रहिए ब्रेक्रिंग न्यूज़ का सिलसिला
वरना कुरानों वाला कयामत का खदशा होगा

कलम तल्ख़ क्यों हो गई `सागर`
जरूर वाकिआ बदल गया होगा

17 टिप्पणियाँ:

कुश said...

चाँद अगर किसी को नहलाएगा तो यकीनन काँधे से महक तो आएगी ही..
मैं तो कहता हु साले तुम पागल हो गए हो.. :)

Satya.... a vagrant said...

हो सके तो उस तिल को क्वांरा रखनामेरे चूमे से जो गहरा गया होगा

(ye mere dil ke jakhm zaati hain)

mishal e sukhanwari.
bahut umda .
satya.

नीरज गोस्वामी said...

सागर साहब दाद खाज खुजली सब हाज़िर है...खूब लिखते हैं आप...हालाँकि ग़ज़ल के व्यकरण के हिसाब से अभी कुछ कमी है बाकि सब ठीक ठाक है...ठीक ठाक क्या बढ़िया है...

नीरज

pukhraaj said...

ग़ज़ल अच्छी है सागर जी ....इसी से पता चलता है कई दिनों से उदासी छाई है ...ये बिन मानसून के बादल कैसे है ...पूछने का हक़ तो नहीं पर कभी कभी ऐसा होता है ...जब दिल को कुछ भाता नहीं है ....ये उदासी पल दो पल की मेहमान होती है ....आई है तो जायेगी भी ....निराश न होना बस ...आशा ही जीवन है ....वैसे इस उदासी में जब भी कलम उठाई है कोई खूबसूरत बात सामने आई है ....

गौतम राजरिशी said...

सागर साब कयामत बुन रहे हो यार कि मिस्‍रे...???

तनिक नीरज जी की बातों का ध्यान धरो तो ग़ज़ल-गाँव में हलचल मच जायेगी...

और हाँ मेरे ख्याल से गलियों में रात उतरती है...

क्वांरे तिल पे खूब-खूब दाद..

Apoorv said...

सागर साहब आपकी इस पोस्ट को पिछले २-३ घंटे मे ४-५ बार घोट गया रिलीजियसली..और क्या करूँ इतने तो मसाले डाले हुए हैं आपने..एक से एक सख्त तासीर वाले..सो एक बार मे हजम ही नही होती..
रिश्ते मुलाकातों पर निगाहों से तसदीक करते हैं
इस दरम्यां दौलत में क्या इजाफा हुआ होगा
रिश्ते की दौलत का दौलत से रिश्ते का क्या खूब ट्रिगोनोमेट्रिकल समीकरण दिया आपने.

तुम्हारा तसव्वुर, तुम्हारे कांधे सा महकता है
तुम्हें ता-उम्र चांद ने नहलाया होगा

तसव्वुर जो एक अमूर्त सी इन्न्टैन्जिबल चीज है और उसको कांधे जैसी मूर्त और प्रत्यक्ष चीज के साथ एक ही लेवल पर लेआना एक खुशबू के आरोपण के द्वारा..बस एक्स्पर्ट लोगों के बस की बात है..आप जैसे

सुना है वो वादी था, अब कमरा बन गया!
मेरी मानो, ईश्क में नाकाम हुआ होगा
यह चीज ही ऐसी है, जिसके होने पर समूची वादी, समूचा आकाश भी कम पड़ता है समाने को..और खुमार उतरने के बाद एक कमरा..बल्कि एक कोना काफ़ी होता है खुद को खुद से छुपाने के लिये
जेब भारी हो गए, कद घटने लगेपेशे मे
जरूर 'हाँ जी- हाँ जी' मिला दिया होगा
भई आज के जमाने मे जब आपके सूट की मँहगाई और कार की लम्बाई और बैंक बैलेंस की मोटाई आपका कद तय करती है..हाँ जेब के कद से रिलेशन मे ग्रैविटी का जो योगदान आपने दिखाया वो मस्त रहा.
खबरें कहीं से भी राहतों के नज़र नहीं आते
तो क्या, खुदा शहर से बेवफा हुआ होगा?
शहर ने खुद कब खुदा से वफ़ा की है कभी.
पर्दे पर देखते रहिए ब्रेक्रिंग न्यूज़ का सिलसिला वरना कुरानों वाला कयामत का खदशा होगा
राखी को ब्रेकिंग न्यूज मे दख कर क़यामत तो नही पर एक मास-मैडनेस का अंदेशा जरूर होता है
और सबसे बेस्ट आखिरी के लिये
हो सके तो उस तिल को क्वांरा रखना
मेरे चूमे से जो गहरा गया होगा
इस पर कुछ और न कहते हुए बस इतनी दुआ करूंगा कि आपकी गुज़ारिश सही जगह पहुँच जाय बस ;-)
ऐसे ही बदलते रहिये वाक्ये कभी-कभी.

अम्बरीश अम्बुज said...

मैं मुतमईन होकर खुदकशी का कायल हूं
लोग कहते हैं कि `साला! पगला गया होगा
aur..
पर्दे पर देखते रहिए ब्रेक्रिंग न्यूज़ का सिलसिला
वरना कुरानों वाला कयामत का खदशा होगा

bahut kuch kah diya aapne...

ओम आर्य said...

हो सके तो उस तिल को क्वांरा रखना
मेरे चूमे से जो गहरा गया होगा

बड़ी जालिम हैं तेरी आँखें
हुश्न का कत्ल उसने हिन् किया होगा

सागर said...

गलतियों को आगे से सुधारने का प्रयास करूँगा... (यह कोई गारंटी नहीं है)
अभी यह नसीहतें दिल बहला रही हैं...

... एक शुब्बा... यह भी है की नीरज जी और गौतम साहेब का कमेन्ट ज़ाया जायेगा... मुझे यह अपने प्रति प्यार जैसा लग रहा है...

डॉ .अनुराग said...

तो हजूर अब ग़ज़ल पे हाथ रख दिया है ....

रवि कुमार, रावतभाटा said...

खबरें कहीं से भी राहतों के नज़र नहीं आते
तो क्या, खुदा शहर से बेवफा हुआ होगा?

वाह जनाब...

raj said...

lagta hai lekhni ne kafi fursat se likha hai tabhi kuchh chhoot nahi paya......

अर्कजेश said...

हद्द कर दी आपने ! इतना मोहक भी लिखा जा सकता है क्या !

Udan Tashtari said...

बहुत सही..भाव उम्दा हैं..बाकी भी रफ्ता रफ्ता...छा जायेंगे आप.

Sudhir (सुधीर) said...

वाह क्या बात है...हम तो आपके तिल वाले शेर के बारे में सुनकर आये थे पर कायल हो गए इस शेर के

जेब भारी हो गए, कद घटने लगे
पेशे में जरूर 'हाँ जी- हाँ जी' मिला दिया होगा

दर्पण साह "दर्शन" said...

behteri as'aar !!

@pukhraaj Ji...
Ise ghazal na kehein to nehtar hoga...

kahli kyun padna 'Kafiye', 'Radeef', 'Behar', 'Vazn','Rukn' ke chakkar main?

Abhi to bus gum hoon...

"गलियों में रात उतर गया होगा तभी आमदो-रफ़्त घट गया होगा
रिश्ते मुलाकातों पर निगाहों से तसदीक करते हैंइस दरम्यां दौलत में क्या इजाफा हुआ होगा
"

Flawless Thoughts.

दर्पण साह "दर्शन" said...

मैं मुतमईन होकर खुदकशी का कायल हूंलोग कहते हैं कि `साला! पगला गया होगा`


kya main bhi 'Aproov' ji ko dosh doon is pagalpane ke liye jo mujhse keh raha hai...
..Ek post aur !!
Bus Ek post aur?