नज़्म-नज़्म लाल लिख
दिन,महीने, साल लिख
लहराते झंडों के साए में
जवां वीरों के भाल लिख
महज़ खोखले उड़ान न भर
ज़र्रा-जर्रा कमाल लिख
खबरें न सुना दुनिया भर की
पात-पात, हाल-ए-डाल लिख
ईश्क है, परवान चढ़ने से पहले
पड़ोसियों की चाल लिख
सबके ऊपर उसका ही सरमाया है
जो बोले सो निहाल लिख
बड़ा शातिर है रकीब अपना
बधाईयों की चाल लिख
पूरब से आया नहीं कोई झोंका
इस बरस तो अपना हाल लिख
दायरा कलम का बढ़ा अपनी
चापलूसी छोड़ए नमकहलाल लिख
एक्स-रे करना बंद कर `सागर`
रूखसार थे उनके लाल लिख