थकते-हांफते शहर में
बची रहे तुतलाई आवाज़
बची रहे सिंदूरी शाम,
रेत पर पैरों के निशान,
किसी पत्थर पर इत्मीनान से रखे कंधे
बुजुर्गों के माथे पर अनुभव से उगी सुस्ताई झुर्रियां
बची रहे आवाजाही,
बची रहे धोखेबाजी
हक़ की लड़ाई, बागी तेवर
घोड़ों की सरपट टाप
कानफोड़ू शोर के बीच
अंर्तनाद।
बची रहे मौलिकता
बचा रहे साक्ष्य
विषय-क्रम जो
कालांतर में पीढ़ियों के
पाठ्यक्रम में शामिल रहे
बची रहे
सैनिक की सेहत,
खिलाड़ी की अदम्य जिजीविषा,
रोटी की खुशबू,
पसीने की महक,
शराबी का प्यार,
कामी की वासना,
पापी का उपेक्षित कर्म,
कवि का कविता-कर्म
औ'
औरत के जज्बात का मर्म
मदमाती लौ,
बचे रहें भटकते कदम
मैं चाहूंगा कि...
बचा रहे हमारा प्रेम
इसके लिए तुम बचाना
मेरे अस्तित्व का अध्याय
जैसे मैंने बचाए हैं
अपमानित होने की दशा में
मुंह चुराती शर्मिंदगी
जैसे
अभाव में बच जाते हैं सपने
जैसे
मौके गंवाने के बाद
बच जाता है पछतावा
... बचाए रखना हमारा प्रेम
उम्र के किसी मोड़ तक
शायद; अगले मिलन तक
बची रहना तुम भी,
बचाए रखना आंखों के डोरे में तैरता रक्त प्रवाह
मैं चाहूंगा कि
कल जब इतिहास खंगाले
सभ्यता
तो;
छन कर बच जाए
...प्रेम...